बस्तर (छत्तीसगढ़)
बस्तर अंचल को पृथक राज्य बनाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार की बात को लेकर सुकमा जिले से एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान का आगाज किया गया है।
इस अभियान के जरिए स्थानीय नागरिक, युवा और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि बस्तर को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग उठा रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि बस्तर क्षेत्र क्षेत्रफल और प्राकृतिक संसाधनों के मामले में देश के कई राज्यों से बड़ा है, फिर भी यह क्षेत्र अपेक्षित विकास से दूर रहा है।
अभियान की प्रमुख बातें:
- सुकमा से शुरुआत: अभियान का पहला चरण सुकमा से शुरू हुआ है, जिसे आने वाले दिनों में बीजापुर, दंतेवाड़ा, कांकेर, जगदलपुर, कोंडागांव और नारायणपुर तक ले जाया जाएगा।
- जनसमर्थन जुटाने की रणनीति: हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से लाखों लोगों के समर्थन पत्र एकत्र कर शासन और प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की योजना है।
- प्रमुख मांगें: जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय नियंत्रण, त्वरित प्रशासनिक निर्णय, और शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार का विस्तार।
पृथक बस्तर की मांग पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कड़ा रुख
बस्तर को अलग राज्य बनाने की उठ रही मांग पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने पृथक बस्तर राज्य की मांग करने वालों को सीधे तौर पर “विकास विरोधी” करार दिया है।
मुख्यमंत्री के बयान के मुख्य अंश:
- ‘मांग करने वाले विकास विरोधी’: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जो लोग बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं, वे असल में क्षेत्र के विकास और छत्तीसगढ़ की जनता के विरोधी हैं।
- डबल इंजन सरकार की उपलब्धियां: उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन सरकार’ के प्रयासों से बस्तर में दशकों पुराने नक्सलवाद का खात्मा संभव हो पाया है। जो काम पहले असंभव लगता था, उसे सुरक्षा बलों के साहस और मजबूत इच्छाशक्ति से पूरा किया गया है।
- मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर: साय ने कहा कि नक्सली बस्तर में स्कूल, अस्पताल और सड़कें नहीं बनने देना चाहते थे। अब सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के दूरदराज इलाकों में बुनियादी ढांचा पहुंचाकर उसे मुख्यधारा में सबसे आगे लाने और देश का सबसे बेहतर आदिवासी संभाग बनाने पर है।





